परिचय
राजस्थान इतिहास और संस्कृति से भरा हुआ है इसी राजस्थान पर बसा है विराटनगर जिसे प्राचीन समय में बैराठ कहा जाता था यह स्थान जयपुर जिले में वर्तमान में कोटपुतली-बहरोड़ जिले में स्थित है बैराठ का उल्लेख इतिहास में मत्स्य जनपद की राजधानी के रूप में मिलता है यह स्थान न केवल प्राचीन भारत की राजनीतिक व्यवस्था को दर्शाता है बल्कि यह पुरातात्विक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है
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| Viratnagar (बैराठ सभ्यता) |
महाजनपद काल में बैराठ की पहचान
महाजनपद काल में भारत सोलह प्रमुख जनपदों में विभाजित था जिनमें मत्स्य जनपद एक महत्वपूर्ण जनपद था। इस मत्स्य जनपद की राजधानी बैराठ थी जिसे उस समय विराटनगर कहा जाता था। कहा जाता है कि राजा विराट के शासन में यह नगर समृद्ध और व्यवस्थित था। यही वह स्थान है जहाँ महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास का एक वर्ष व्यतीत किया था
उत्खनन कार्य और पुरातात्त्विक खोजें
बैराठ का पहला वैज्ञानिक उत्खनन 1936 से 1937 के बीच पुरातत्वविद दयाराम साहनी के नेतृत्व में हुआ बाद में 1962 से 1963 के बीच नीलरत्न बनर्जी और कैलाशनाथ दीक्षित ने यहाँ पुनः खुदाई करवाई खुदाई में कई महत्वपूर्ण स्थलों की पहचान हुई जिनमें भीम जी की डूंगरी, बीजक की पहाड़ी और महादेव जी की डूंगरी प्रमुख हैं
इन खुदाइयों से प्राप्त अवशेषों ने यह स्पष्ट कर दिया कि बैराठ में मौर्यकाल, बौद्धकाल, गुप्तकाल और मुगलकाल तक सतत बसावट रही यहाँ से प्राचीन मिट्टी के पात्र, ईंट के ढांचे, धातु के औजार, सिक्के, मूर्तियाँ और अभिलेख मिले हैं जो इस स्थल के समृद्ध इतिहास का प्रमाण हैं
भीम की डूंगरी और पौराणिक कथा
विराटनगर की प्रसिद्ध भीम जी की डूंगरी का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है ऐसा कहा जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान द्रौपदी को प्यास लगी तब भीमसेन ने अपने पैर से चट्टान पर प्रहार किया जिससे जल निकला उस स्थान को आज भी लोग भीमतला के नाम से जानते हैं यहाँ एक छोटा तालाब जैसा गड्ढा है जिसमें आज भी वर्ष भर पानी भरा रहता है
मौर्यकालीन और बौद्धकालीन धरोहरें
बैराठ की बीजक की पहाड़ी से मौर्यकालीन स्तूप और चैत्यगृह के अवशेष मिले हैं यह स्तूप लकड़ी के 26 स्तंभों से निर्मित था और इसके चारों ओर पत्थर तथा ईंटों से बनाई गई दीवारें थीं वर्ष 1999 में की गई खुदाई में यहाँ से अशोक कालीन गोल बौद्ध मंदिर और बौद्ध मठों के अवशेष भी मिले माना जाता है कि यह मठ हीनयान संप्रदाय से संबंधित थे
इसी पहाड़ी से रहस्यमयी उत्तर गुप्तकालीन शंख लिपि के प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं यह इस बात का संकेत है कि बैराठ उस समय शिक्षा और धर्म का प्रमुख केंद्र रहा होगा
शैलचित्र और अभिलेख
वर्ष 1990 में बैराठ के आसपास की पहाड़ियों में कई शैलचित्र खोजे गए इन चित्रों में लाल, काले और अन्य रंगों से मानव आकृतियाँ और पशु-पक्षियों के दृश्य उकेरे गए हैं इनसे यह सिद्ध होता है कि यहाँ के लोग प्रागैतिहासिक काल से ही चित्रकला के जानकार थे
भानू पहाड़ी से सम्राट अशोक के ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण दो प्रस्तर लेख प्राप्त हुए इन शिलालेखों से पता चलता है कि मौर्यकाल में यह स्थान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र था यहाँ अशोक कालीन ब्राह्मी लिपि की अक्षरयुक्त ईंटें भी मिली हैं जो उस समय के निर्माण कार्य की उत्कृष्टता को दर्शाती हैं
विदेशी यात्रियों का उल्लेख
चीन के यात्री ह्वेनसांग ने भारत यात्रा के दौरान लगभग 634 ईस्वी में इस स्थान का भ्रमण किया था उसने अपने लेख में विराटनगर को पो लि ये ता लो कहा और यहाँ के 8 बौद्ध मठों का उल्लेख किया उनमें से 2 मठ बीजक की पहाड़ी पर स्थित थे इससे स्पष्ट होता है कि उस समय विराटनगर बौद्ध शिक्षा का प्रसिद्ध केंद्र था
प्राचीन सिक्के और धातु के उपकरण
बैराठ के उत्खनन से ताम्रयुगीन ऑकर कलर पॉटरी संस्कृति के अवशेष मिले हैं यहाँ से लोहे के तीर और भाले प्राप्त हुए जो यह दर्शाते हैं कि यहाँ के लोग लौह धातु के उपयोग में निपुण थे खुदाई में चाँदी की 36 मुद्राएँ मिलीं जिनमें 8 पंचमार्क सिक्के और 28 यूनानी सिक्के शामिल हैं इनमें से 16 सिक्के यूनानी शासक मिनेंडर के हैं
इन सिक्कों के साथ मिला कपड़ा हाथ से बुनी हुई रूई का था जिससे यह साबित होता है कि यहाँ के लोग वस्त्र निर्माण कला में भी निपुण थे खुदाई में प्राप्त स्वर्ण मंजूषा में भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष भी मिले जो इस स्थान के धार्मिक महत्व को और बढ़ाते हैं
मुगल कालीन निर्माण और अकबर की टकसाल
मुगल सम्राट अकबर ने विराटनगर में एक टकसाल स्थापित की थी जहाँ बाद में जहाँगीर के काल में ताँबे के सिक्के ढाले जाते थे इसके साथ ही अकबर ने यहाँ एक सुंदर मुगल गार्डन, ईदगाह और अन्य इमारतें भी बनवाई थीं इतिहास में उल्लेख है कि अकबर अजमेर की यात्रा के दौरान विराटनगर में रात्रि विश्राम करता था
विनाश और पुनर्जीवन की कहानी
इतिहासकार दयाराम साहनी के अनुसार हुष शासक मिहिरकुल ने बैराठ को नष्ट कर दिया था लेकिन इसके बावजूद यह स्थान पुनः विकसित हुआ और मौर्य, गुप्त और मुगल काल में लगातार समृद्ध होता रहा इस क्षेत्र के उत्खनन से यह सिद्ध होता है कि यह न केवल व्यापार का बल्कि धर्म और शिक्षा का भी एक बड़ा केंद्र था
बैराठ की वर्तमान स्थिति
आज बैराठ (विराटनगर) राजस्थान का एक प्रमुख पुरातात्त्विक स्थल है यहाँ पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित क्षेत्र बनाए गए हैं जहाँ बीजक की पहाड़ी, भीम जी की डूंगरी और महादेव जी की डूंगरी प्रमुख आकर्षण हैं यहाँ देशभर से विद्यार्थी और शोधार्थी अध्ययन करने आते हैं यह स्थान न केवल इतिहास प्रेमियों के लिए बल्कि आम पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है
निष्कर्ष
बैराठ का इतिहास भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण है यहाँ की मिट्टी में हजारों वर्षों का इतिहास छिपा हुआ है पौराणिक काल से लेकर मुगल काल तक यह स्थान अनेक सभ्यताओं का साक्षी रहा है यह स्थल आज भी राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को गर्व के साथ प्रदर्शित करता है
FAQs
विराटनगर राजस्थान के जयपुर जिले में, वर्तमान में कोटपुतली-बहरोड़ जिले के अंतर्गत स्थित है। यह अरावली पर्वतमाला की गोद में बसा एक प्राचीन ऐतिहासिक नगर है।
प्राचीन काल में विराटनगर को “बैराठ” कहा जाता था। यह मत्स्य जनपद की राजधानी थी और महाभारत काल में राजा विराट का नगर माना जाता है।
महाभारत के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास का एक वर्ष विराटनगर में बिताया था। कहा जाता है कि इसी दौरान द्रौपदी और भीमसेन से जुड़ी कई घटनाएँ यहीं घटी थीं।
बैराठ में पहला वैज्ञानिक उत्खनन 1936–1937 में पुरातत्वविद दयाराम साहनी के नेतृत्व में हुआ था। बाद में 1962–63 में नीलरत्न बनर्जी और कैलाशनाथ दीक्षित ने पुनः खुदाई करवाई।
यहाँ से मौर्यकालीन स्तूप, बौद्ध मठ, अशोक शिलालेख, ताम्रयुगीन उपकरण, यूनानी सिक्के, स्वर्ण मंजूषा और भगवान बुद्ध के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
भीम जी की डूंगरी महाभारत काल से जुड़ा स्थल है। कहा जाता है कि प्यास लगने पर भीम ने अपने पैर से चट्टान पर प्रहार किया था, जिससे जल निकला। आज भी वहाँ एक छोटा जलकुंड मौजूद है।
बीजक की पहाड़ी से मौर्यकालीन स्तूप, अशोक कालीन गोल बौद्ध मंदिर और ब्राह्मी लिपि के लेख मिले हैं। यह स्थान बौद्ध धर्म का प्रमुख केंद्र रहा है।
चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 634 ईस्वी में भारत यात्रा के दौरान विराटनगर को “पो-लि-ये-ता-लो” कहा और यहाँ के आठ बौद्ध मठों का उल्लेख किया था।
मुगल सम्राट अकबर ने यहाँ टकसाल स्थापित की थी जहाँ सिक्के ढाले जाते थे। अकबर ने यहाँ एक मुगल गार्डन और ईदगाह भी बनवाई थी।
आज बैराठ राजस्थान का प्रमुख पुरातात्त्विक स्थल है। यहाँ पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित क्षेत्र बनाए गए हैं जहाँ देशभर से शोधार्थी और पर्यटक अध्ययन के लिए आते हैं।

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